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"kill me… I will forgive you..!! Pain' guilt

कमरे में फिर से वही भारी सा सन्नाटा छा जाता है। अवंतिका एक सेकंड के लिए पूरी तरह शॉक्ड हो जाती है। उसे अपने ही कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसने अभी-अभी क्या सुना। “आई नो योर ट्रुथ…” यह शब्द उसके दिमाग में बार-बार गूंज रहे थे। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है। वह डिसबिलीफ के साथ अविनाश को देखती रह जाती है, जैसे समझ ही नहीं पा रही हो कि वह क्या बोल रहा है। क्या सच में… वह सब कुछ जानता है…? अविनाश के लिप्स हल्के-हल्के कांप रहे थे और उसके हाथ भी स्टेबल नहीं थे। वह अपनी बात कंप्लीट करने की कोशिश करता है। “यस… आई नो… आई नो ऑल योर ट्रुथ… आई नो अबाउट योर लाइफ…!!”

उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी लेकिन हर शब्द जैसे भारी हो गया था। वह आगे बोलने की कोशिश करता है, “आई नो… आज से पहले तुम कभी किसी से…” लेकिन उसके शब्द गले में ही अटक जाते हैं। उसकी आंखों में हल्की सी नमी आ जाती है, जैसे आगे बोलना उसके लिए आसान नहीं था। वह एक सेकंड के लिए आंखें बंद करता है और फिर खुद को फोर्स करके आगे बोलता है। “मुझे सब पता है कि तुमने यह सब क्यों किया… तुम्हें अपनी मॉम के ऑपरेशन के लिए पैसे चाहिए थे… इसीलिए तुम… कॉल गर्ल बनी…!!”

अविनाश ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “अवंतिका…”

अपने नाम को उसके मुंह से सुनते ही अवंतिका की हार्टबीट जैसे एक पल के लिए स्किप कर जाती है। वह वहीं फ्रिज होकर खड़ी रह जाती है। उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था, जैसे उसका दिमाग ही काम करना बंद कर गया हो। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि कैसे रिएक्ट करे, क्या बोले… सब कुछ अजीब सा लग रहा था। वह बस खाली आंखों से अविनाश को देखती रह जाती है।

अविनाश फिर धीरे से बोलता है। “मेरे अलावा तुम्हें किसी ने टच नहीं किया… आई नो… मुझे… मुझे  पता कि मैंने तुम्हें कितना हर्ट किया है… आई नो… बट जब तुम मेरे पास पहली बार आई थी तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम्हारी सिचुएशन क्या है…? क्यों मुझसे छुपाया…? क्यों मुझे ऐसा दिखाया कि तुम एक…”

उसके शब्द फिर से रुक जाते हैं। लेकिन तभी अवंतिका अचानक अपनी ख्यालों से बाहर आती है और जोर से हंसने लगती है। उसकी हंसी बिल्कुल नॉर्मल नहीं थी। वह पूरी तरह सारकास्टिक थी… उसकी आंखों में आंसू भी थे लेकिन फिर भी वह हंस रही थी। वह हंसी सच में थोड़ी डरावनी लग रही थी। अविनाश उसे डिसबिलीफ के साथ देखता रह जाता है। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह ऐसा क्यों बिहेव कर रही है।

कुछ सेकंड बाद अवंतिका अपनी हंसी रोकती है और अपने रूंधे हुए गले के साथ बोलती है, “मैं क्यों बताती आपको, मिस्टर मल्होत्रा…? क्यों बताती मैं अपनी सिचुएशन…? आप होते कौन हैं मेरे बारे में जानने वाले…? मेरे पति…? मेरे भाई…? या फिर मेरे लाइफ में कोई ऐसा इंसान जिससे मेरा कोई रिश्ता हो…?”

वह हल्का सा सिर हिलाती है। “कुछ भी नहीं थे आप मेरे लिए। तो फिर मैं आपसे हेल्प क्यों मांगती…? क्यों बताती आपको अपने बारे में…? क्या रिश्ता है हमारा… कुछ भी नहीं…!! वैसे भी आपके लिए तो यह रोज का काम है ना… हर दिन नई लड़की के साथ इंटीमेट होना… जस्ट…”

उसके शब्द सीधे अविनाश के दिल में चुभ रहे थे। वह बिल्कुल फ्रिज हो गया था। उसकी इतनी सारकास्टिक हंसी और उसकी आंखों में छुपे दर्द को देखकर वह समझ सकता था कि वह कितनी टूटी हुई है।

अवंतिका अचानक फिर बोलती है, “ओके मिस्टर मल्होत्रा… काफी बकवास बातें हो गईं… बस पांच मंथ और… फिर मैं आपके इस नाटक से आज़ाद हो जाऊंगी। पहले वन नाइट स्टैंड… फिर वन मंथ कॉन्ट्रैक्ट… और अब सिक्स मंथ कॉन्ट्रैक्ट और फेक वाइफ… राइट…?”

फिर वह सीधे उसकी आंखों में देखती है। “चलिये यह सब छोड़िए… आप मुझे बस यह बताइए कि आज मैं आपको कैसे सैटिस्फाई करूं…? काफी टाइम वेस्ट हो गया है…”

इतना बोलकर वह फिर से अविनाश की आंखों में आंखें डालकर देखने लगती है। लेकिन इस बार अविनाश उसकी नजरों का सामना नहीं कर पाता। वह तुरंत अपनी नजर नीचे कर लेता है। उसकी सांसें भारी हो जाती हैं… और अगले ही पल वह अचानक घुटनों के बल बैठ जाता है। उसकी सांसें भारी हो रही थीं, जैसे हर शब्द बोलना उसके लिए मुश्किल हो रहा हो। कुछ सेकंड तक वह चुप रहता है, फिर धीमी आवाज़ में बोलना शुरू करता है।

“इट्स नथिंग लाइक कॉन्ट्रैक्ट… मैं… मैं सच में नहीं जानता कि इसे कैसे एक्सप्लेन करूं। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा कि मैं तुम्हें क्या और कैसे बताऊं। जब मैंने तुम्हें पहली बार उस क्लब में देखा था ना… मुझे इतना गुस्सा आया था कि मैं खुद से ही डर गया था। उस टाइम मुझे लगा था कि वो गुस्सा सिर्फ इसलिए है क्योंकि… क्योंकि तुम मेरी एक्स वाइफ थी। लेकिन बाद में समझ आया कि बात सिर्फ इतनी नहीं थी।”

वह एक सेकंड के लिए रुकता है, जैसे अपने शब्द ढूंढ रहा हो। “शायद उस दिन से ही… कहीं अंदर… तुम मेरे लिए सिर्फ एक नाम या रिश्ता नहीं रही थी। लेकिन उस टाइम मैं इतना अंधा था अपने गुस्से और अपने ईगो में कि मैंने कभी ये समझने की कोशिश ही नहीं की कि तुम क्या झेल रही हो। मैंने तुम्हें जज किया… तुम्हें गलत समझा… और तुम्हें वो दर्द दिया जो किसी को नहीं देना चाहिए।”

उसकी आवाज़ और धीमी हो जाती है। “ओर जब मुझे तुम्हारे बारे में सब पता चला… कि तुमने वो सब क्यों किया… तुम्हारी मॉम के लिए… तुम्हारी सिचुएशन क्या थी… तब मुझे पहली बार समझ आया कि असल में गंदा कौन था। तुम नहीं… मैं था।”

उसकी उंगलियाँ कसकर आपस में पकड़ जाती हैं।
“मैंने तुम्हें हर बार हर्ट किया… हर बार इंसल्ट किया… और फिर भी तुमने कभी मेरे सामने खुद को जस्टिफाई करने की कोशिश नहीं की। मुझे नहीं पता कि तुमने ये सब कैसे सहा… लेकिन मैं जानता हूं कि मैं तुम्हारे लिए कुछ भी डिजर्व नहीं करता। तुम्हारी माफी भी नहीं।”

वह धीरे से सिर झुका लेता है। “लेकिन एक बात सच है… और शायद पहली बार मैं ये बिना किसी ईगो के बोल रहा हूं। मुझे नहीं पता कब… कैसे… लेकिन मैं तुमसे… मोहब्बत करने लगा हूं। सच में। इतनी कि जब भी तुम्हें किसी और के साथ सोचता था ना… तो अंदर कुछ टूट जाता था। जब तुम ऐसे बोलती थी कि तुम्हारे लिए ये सब नॉर्मल है… कि तुम किसी के साथ भी जा सकती हो… मुझे सच में ऐसा लगता था जैसे किसी ने मेरे ऊपर तेजाब डाल दिया हो। अंदर से सब जलने लगता था।”

कमरे में उसकी भारी सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
“मुझे पता है… ये सब बोलने का शायद अब कोई मतलब नहीं है। क्योंकि जो दर्द मैंने तुम्हें दिया है… उसके बाद शायद मेरे पास तुम्हारे सामने खड़े होने का भी हक नहीं बचता। लेकिन फिर भी… अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए जरा सा भी गुस्सा है… नफरत है… तो वो भी मैं एक्सेप्ट करूंगा। बस… एक बार… अगर हो सके तो… forgive me मेरी अर्धांगिनी...मेरी स्वामीनी....!!

यह कहकर वह वहीं चुप हो जाता है। कमरे में फिर से वही सन्नाटा फैल जाता है। अवंतिका अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन वह उन्हें गिरने नहीं देती। कुछ सेकंड बाद… उसके होंठ हल्के से हिलते हैं। और बहुत धीमी आवाज़ में वह बोलती है—

“देन किल मी… आई विल फॉरगिव यू।” उसके शब्द कमरे की हवा को जैसे काट देते हैं।

अविनाश का सिर, जो अभी तक झुका हुआ था, अचानक ऊपर उठ जाता है। उसकी आंखों में साफ शॉक था, जैसे उसे उम्मीद ही नहीं थी कि अवंतिका ऐसा कुछ कहेगी। उसके होंठ हल्के से हिलते हैं और बहुत धीमी आवाज़ निकलती है, “व्हाट…?”

अवंतिका अभी भी उसकी तरफ नहीं देख रही थी। उसका चेहरा दूसरी तरफ था, लेकिन उसकी आंखों के कोने से आंसू चुपचाप नीचे गिर रहे थे। वह फिर धीरे से बोलती है,

“हाँ… मार दीजिए मुझे। शायद वही सबसे आसान रास्ता है, मिस्टर मल्होत्रा।”

उसकी आवाज़ शांत थी… लेकिन उस शांति के अंदर बहुत गहरा दर्द छुपा हुआ था। “क्योंकि सच बोलूं… तो जो लड़की पहले थी ना… वो उसी दिन मर गई थी… जिस दिन आपने उसे पहली बार जज किया था।”

अविनाश की सांस जैसे अटक जाती है। अवंतिका धीरे-धीरे उसकी तरफ मुड़ती है। उसकी आंखें लाल हो चुकी थीं। “आपको लगता है आपने मुझे हर्ट किया…? नहीं मिस्टर मल्होत्रा… आपने मुझे हर्ट नहीं किया… बिल्कुल भी नहीं…!”

वह हल्का सा हंसती है… लेकिन उस हंसी में कोई खुशी नहीं थी। “आपने मुझे जीते-जी मार दिया।”

वह कुछ सेकंड तक उसे देखती रहती है, फिर धीरे से बोलती है, “आपको याद है हमारी फर्स्ट नाइट…? मैं इसी कमरे में आपका इंतज़ार कर रही थी। मैं सोच रही थी कि शायद… शायद मेरा पति मेरे पास आएगा… मुझसे बात करेगा… मुझे समझने की कोशिश करेगा…”

उसकी आवाज़ हल्की सी कांप जाती है। “लेकिन आप आए ही नहीं… क्योंकि आपके लिए शादी सिर्फ एक खेल थी।”

अविनाश की उंगलियां जमीन पर कस जाती हैं। अवंतिका आगे बोलती है, “और जब मैं आपको क्लब में मिली थी… उस टाइम भी तो आपने मुझसे कुछ नहीं पूछा था ना…? आपने एक बार भी ये जानने की कोशिश नहीं की कि मैं वहां क्यों थी… मेरी लाइफ में क्या चल रहा था… तो फिर मैं क्यों बताती आपको…?”

उसकी आंखों में फिर से आंसू भर आते हैं। “आप होते कौन हैं… जिससे मैं अपनी तकलीफ शेयर करती…?”

वह एक गहरी सांस लेती है, जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रही हो। “तो हाँ… अगर आपको सच में माफी चाहिए ना… तो बहुत आसान है।”

अब वह सीधा उसकी आंखों में देखती है। “मार दीजिए मुझे… क्योंकि जिस लड़की से आप माफी मांग रहे हैं… वो अब बची ही नहीं है।”

अविनाश जैसे वहीं जड़ हो जाता है। उसकी आंखों में पानी भर आता है… लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाता।
कुछ सेकंड तक दोनों के बीच सिर्फ खामोशी रहती है।
फिर अविनाश की आवाज़ बहुत धीमी आवाज़ आई। “तुम सही कह रही हो… शायद मैं उस लड़की को वापस नहीं ला सकता… शायद तुम मुझे दोबारा कभी माफ नहीं कर पाओगी… शायद तुम्हारी आंखों में वो प्यार मैं फिर कभी नहीं देख पाऊंगा जो मैंने पहली बार देखा था…”

वह हल्का सा रुकता है। “लेकिन ये सब सिर्फ शायद है।”

वह उसकी तरफ देखता है। “अगर मेरी पूरी जिंदगी भी लग जाए… तो भी मैं कोशिश करूंगा कि तुम्हें फिर से जीना सिखा सकूं। क्योंकि अब मैं तुम्हें अपना नहीं… खुद को तुम्हारा बनाना चाहता हूं। सिर्फ तुम्हारा… तुम्हारा अर्धांग बनकर… पूरी जिंदगी… हर जन्म में… तुम ही मेरी अर्धांगिनी रहो।”

उसकी आवाज़ अब और भी भारी हो जाती है। “मैं बस तुम्हें वो सब देना चाहता हूं… जिसकी तुम हकदार हो… जो तुम डिजर्व करती हो।”

अवंतिका तुरंत हंस पड़ती है… वही कड़वी हंसी। “डोंट ट्राय टू बी अ हीरो, मिस्टर मल्होत्रा।”

उसकी हंसी कमरे में गूंजती है, लेकिन उस हंसी में इतनी कड़वाहट थी कि सुनने वाले का दिल बैठ जाए। अविनाश वहीं घुटनों के बाल बैठा था। वह कुछ बोलना चाहता था… लेकिन शब्द जैसे गले में ही अटक गए थे। अवंतिका धीरे से सिर हिलाती है। “आपको सच में लगता है कि लाइफ इतनी सिंपल होती है…? कि आप आए… दो चार डायलॉग बोले… और सब कुछ ठीक हो गया…?”

वह उसकी आंखों में देखती है। “इतना आसान नहीं होता, मिस्टर मल्होत्रा।”

कमरे में फिर वही सन्नाटा फैल जाता है। अवंतिका धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और बेड के पास जाकर खड़ी हो जाती है। वह अपनी आंखों से आंसू पोंछ लेती है, जैसे खुद को फिर से स्ट्रॉन्ग बनाने की कोशिश कर रही हो।
“आपको पता है सबसे फनी बात क्या है…?” वह बिना उसकी तरफ देखे बोलती है। “आप आज मुझसे माफी मांग रहे हैं… क्योंकि आपको मेरा ट्रुथ पता चल गया।”

वह हल्का सा मुड़कर उसकी तरफ देखती है। “लेकिन अगर आपको ये सब कभी पता ही नहीं चलता… तो क्या तब भी आप माफी मांगते…?”

यह सवाल हवा में ही रह जाता है। अविनाश चुप था।
उसके पास सच में कोई जवाब नहीं था। अवंतिका हल्की सी हंसी हंसती है। “सी… यही फर्क है हम दोनों में।

वह गहरी सांस लेती है। "आप… आप तब तक समझ ही नहीं पाए… जब तक आपको पूरी स्टोरी पता नहीं चल गई।”

अविनाश की आंखें नीचे झुक जाती हैं। अवंतिका फिर शांत आवाज़ में बोलती है। “सो प्लीज… मुझे बदलने की कोशिश मत कीजिए।" कुछ सेकंड तक दोनों के बीच कोई आवाज़ नहीं आती।

फिर अवंतिका धीरे से कहती है‌। “और जहां तक इस शादी का सवाल है…पांच महीने… बस पांच महीने और।”
उसके बाद… आप अपनी लाइफ में फ्री… और मैं अपनी लाइफ में फ्री।”

अविनाश का दिल जैसे फिर से कस जाता है। अवंतिका आखिरी बार उसकी तरफ देखती है। “तो प्लीज… इस सब को ड्रामा मत बनाइए।”

वह धीरे से कहती है‌। “ये बस एक कॉन्ट्रैक्ट है… और कुछ नहीं।”

यह बोलकर वह दूसरी तरफ मुड़ जाती है। कमरे में कुछ सेकंड तक बिल्कुल सन्नाटा रहता है। फिर जैसे अवंतिका ने कोई फैसला ले लिया हो, वह बिना कुछ बोले फिर धीरे-धीरे अपने कपड़े भी निकालकर साइड रख देती है और बेड पर जाकर लेट जाती है। अब वो नेकेड थी उसके चेहरे पर कोई भी इमोशंस नहीं झलक रहे थे। उसका चेहरा छत की तरफ था, आंखें सूखी लेकिन खाली।

फिर वह बिल्कुल सपाट आवाज़ में बोलती है, “अब आपको जो करना है कर लीजिए। आखिर मेरा काम यही है ना… आपको सैटिस्फाई करना।”

उसकी आवाज़ में कोई शर्म नहीं थी… कोई झिझक नहीं… बस एक अजीब सा ठंडापन था। “इसी के लिए पैसे लिए हैं मैंने… बिना काम किए तो नहीं जाऊंगी ना।”

उसके शब्द कमरे में ऐसे गूंजते हैं जैसे किसी ने जानबूझकर जख्म पर नमक छिड़क दिया हो। लेकिन अविनाश… अभी भी वहीं था। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी नजर उठाकर अवंतिका की तरफ देख भी पाए। उसकी नजरें अभी भी जमीन पर टिकी हुई थीं। उसकी मुट्ठियां इतनी कसकर बंद थीं कि उंगलियों की नसें तक उभर आई थीं।

वह अभी भी घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसकी सांसें भारी हो रही थीं। अगले ही पल वह अपनी आंखें कसकर बंद कर लेता है… जैसे खुद को किसी बहुत बड़े दर्द से रोकने की कोशिश कर रहा हो। फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोलता है‌। “नहीं…”

कमरे में उसकी टूटी हुई आवाज़ गूंजती है। वह फिर बोलता है। “ये कॉन्ट्रैक्ट नहीं है… कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है।”

वह धीरे-धीरे सिर हिलाता है। “शादी की है मैंने तुमसे… अवंतिका।”

उसकी आवाज़ भर्रा जाती है। “गलतियां की हैं… बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां की हैं… लेकिन वो सब मेरी बेवकूफी थी… मेरा ईगो था… मेरी अंधी सोच थी।”

वह आखिरकार धीरे से सिर उठाता है… लेकिन फिर भी उसकी नजरें सीधे अवंतिका तक नहीं पहुंच पातीं।
“लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं…

उसकी उंगलियां फिर कस जाती हैं। “मैं इतना गिरा हुआ नहीं हूं कि जिस लड़की को अपनी पत्नी कहा है… उसे ऐसे देखूं… जैसे वो… जैसे वो…”

उसके शब्द फिर रुक जाते हैं। कमरे में फिर सन्नाटा फैल जाता है। अविनाश धीरे से कहता है। “अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारा काम मुझे सैटिस्फाई करना है… तो शायद मैं ही वो इंसान हूं जिसने तुम्हें ये सोचने पर मजबूर किया।”

वह एक गहरी सांस लेता है। “लेकिन आज… अभी… इस पल के बाद… ऐसा कभी नहीं होगा।”

उसकी आवाज़ धीमी थी… लेकिन पहली बार उसमें एक अजीब सा दृढ़पन था। “क्योंकि तुम कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं हो… कोई डील नहीं हो… तुम मेरी पत्नी हो।”

फिर वह धीरे से बोलता है। “और शायद… मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती भी… और सबसे बड़ी सच्चाई भी।”

अविनाश धीरे से खड़ा होता है। उसके घुटने जैसे सुन्न हो गए थे, फिर भी वह किसी तरह खुद को संभाल कर खड़ा हो जाता है। वह एक सेकंड के लिए अवंतिका की तरफ देखने की कोशिश करता है… लेकिन फिर उसकी नजर खुद-ब-खुद नीचे झुक जाती है। वह धीरे से मुड़कर साइड ब्लैक कैट उठाता है। फिर बिना कुछ बोले वो अवंतिका के ऊपर डाल देता है।

उसकी उंगलियां एक पल के लिए रुकती हैं… जैसे वह कुछ कहना चाहता हो… लेकिन कह नहीं पाता। फिर वह धीरे से पीछे हट जाता है। “सो जाओ…” उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी।

अवंतिका की आंखें हल्के से उसकी तरफ घूमती हैं। वह कुछ सेकंड तक उसे देखती रहती है। अविनाश अब खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया था। उसकी पीठ अवंतिका की तरफ थी। दोनों हाथ उसने खिड़की की ग्रिल पर रख दिए थे और सिर थोड़ा झुका हुआ था। कमरे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

कुछ देर बाद अवंतिका धीरे से बोलती है। “ड्रामा मत कीजिए, मिस्टर मल्होत्रा।”

उसकी आवाज़ फिर वही ठंडी थी। “आपको जो चाहिए था… वही तो दे रही हूं मैं।”

अविनाश की उंगलियां ग्रिल पर और कस जाती हैं। वह बिना मुड़े ही जवाब देता है। “मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए।”

अविनाश धीरे से आंखें बंद कर लेता है। फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोलता है‌ “शायद पहले चाहिए होता था…लेकिन अब… मुझे बस एक चीज चाहिए।”

बेड पर लेटी हुई अवंतिका की भौंहें हल्की सी सिकुड़ जाती हैं। वह धीरे से उसकी तरफ देखती है। अविनाश अभी भी खिड़की के पास ही खड़ा था। उसकी पीठ अभी भी अवंतिका की तरफ थी। वह कुछ सेकंड चुप रहता है, जैसे शब्द ढूंढ रहा हो। फिर धीरे से बोलता है। “बस इतना… कि एक दिन… जब तुम मुझे देखो… तो तुम्हारी आंखों में इतनी नफरत ना हो।”

उसकी आवाज़ में कोई शिकायत नहीं थी… बस थकान थी। “मैं ये नहीं कह रहा कि तुम मुझे माफ कर दो… या सब कुछ भूल जाओ… क्योंकि जो मैंने किया है… वो शायद भूलने लायक है ही नहीं।”

वह हल्का सा कड़वा मुस्कुराता है। “लेकिन अगर कभी… बस एक पल के लिए भी…मुझे माफ़ कर सको....तो..

वह रुक जाता है। उसकी उंगलियां अभी भी ग्रिल को पकड़े हुए थीं।“तो शायद… वही मेरे लिए काफी होगा।”

कमरे में फिर खामोशी फैल जाती है। अवंतिका चुपचाप उसे देखती रहती है। पहली बार… उसके चेहरे पर गुस्से के साथ-साथ कुछ और भी था…उलझन।

To be Continue......


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Dark Angel

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𝐉𝐮𝐬𝐭 𝐚 𝐬𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭... 𝐄𝐚𝐫𝐧𝐢𝐧𝐠 𝐭𝐡𝐫𝐨𝐮𝐠𝐡 𝐰𝐫𝐢𝐭𝐢𝐧𝐠 𝐦𝐲 𝐟𝐚𝐧𝐭𝐚𝐬𝐢𝐞𝐬.. 𝐒𝐮𝐩𝐩𝐨𝐫𝐭 𝐚𝐬 𝐦𝐮𝐜𝐡 𝐚𝐬 𝐲𝐨𝐮 𝐜𝐚𝐧..... 𝐢𝐭'𝐥𝐥 𝐛𝐞 𝐨𝐟 𝐠𝐫𝐞𝐚𝐭 𝐡𝐞𝐥𝐩. 𝑺𝒖𝒑𝒑𝒐𝒓𝒕 𝒎𝒆 𝒈𝒖𝒚𝒔 💋

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