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Embarassment| गंदी नज़रें।

इवांश का चेहरा एंबेरेसमेंट और शर्म के मारे ऐसा हो गया था जैसे अभी टमाटर की प्यूरी बन जाएगा। वह वहीं फर्श पर घुटनों के बल बैठा-बैठा बुदबुदाया, "भगवान... उठा ले मुझे... या इस धरती को फाड़कर अंदर खींच ले!"

रागिनी उसे इस हालत में देखकर अपनी हँसी बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी। उसके होंठों पर एक बहुत ही प्यारी और नॉटी सी स्माइल तैर रही थी। उसने प्यार से अपना एक हाथ इवांश के लाल-टमाटर जैसे गाल पर रखा और उसे थोड़ा सा थपथपाते हुए बोली, "अरे-अरे, मेरा मासूम सा प्राणनाथ... इतना शर्मा क्यों रहे हो? फूल-पत्ती वाले अंडरगारमेंट्स पहनना कोई पाप थोड़ी है! कम से कम नेचर से प्यार तो झलकता है तुम्हारा!"

यह सुनकर इवांश का दिल किया कि वह लिफ्ट के कोने में सिर पटक ले। इन फैक्ट, इमेजिनेशन की दुनिया में वह सचमुच यही सब कर रहा था—कभी इधर-उधर भाग रहा था, तो कभी इमेजिनेशन में लिफ्ट के दरवाजे को बार-बार ज़ोर से पीटकर खुद को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था!

उसने हकीकत में धीरे से अपनी आँखें खोलीं और लगभग रोनी सूरत बनाकर हाथ जोड़ते हुए कहा, "मैडम, प्लीज़... प्लीज़... हाथ जोड़कर विनती है... उस टॉपिक पर बात मत कीजिए! मुझे ज़हर दे दीजिए, पर वो फूल-पत्ती वाला चैप्टर हमेशा के लिए बंद कर दीजिए...!"

रागिनी खिलखिलाकर हँस पड़ी। उसकी हँसी की आवाज़ उस छोटी सी लिफ्ट में गूँज उठी। "अच्छा बाबा, ठीक है! नहीं छेड़ती तुम्हें... पर एक बात बताओ, कल कार में फोरप्ले के दौरान तो तुम्हारी हरकतें किसी प्रोफ़ेशनल से कम नहीं थीं, और आज एक छोटे से मज़ाक पर ऐसे कांप रहे हो जैसे कोई स्कूल का बच्चा हो!"

इवांश ने तुरंत दोनों हाथों से अपने कान बंद कर लिए और तौबा करते हुए बोला, "मुझे कुछ याद नहीं है! सच बता रहा हूँ, कल मेरे किसी भूत ने वो सब किया होगा, मैं तो दुनिया का सबसे शरीफ इंसान हूँ... मुझे तो लगा था कि मैंने कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया है और मैं यहाँ आपसे सॉरी बोलने आया था, और बदले में आप मेरा मज़ाक उड़ा रही हैं...!! सॉरी, सॉरी... सारी गलती मेरी ही है! मैं यहाँ आया ही क्यों, जबकि मुझे आपके इस अजीब और खतरनाक बिहेवियर के बारे में अच्छे से पता है? मैं सच में बहुत बड़ा बेवकूफ हूँ, बहुत बड़ा स्टूपिड...!"

तभी अचानक— 'डिंग!'—लिफ्ट की घंटी बजी और दरवाजे खुल गए।

इवांश वहाँ से ऐसे उछलकर भागा जैसे उसके पीछे कोई भूत पड़ गया हो या उसके अंदर कोई रॉकेट फिट कर दिया गया हो! बिना एक सेकंड भी गँवाए वह वहाँ से नौ दो ग्यारह हो गया। रागिनी उसे भागते हुए जाते देख बस मुस्कुराती रह गई, और उसके चेहरे पर एक बेहद नटखट सी स्माइल तैर रही थी। लेकिन जैसे ही लिफ्ट से बाहर निकलकर उसने अपने एम्पलाइज और स्टाफ को देखा, उसने पलभर में अपने चेहरे पर वापस वही सख्त और ठंडे 'बॉस वाले' एक्सप्रेशन्स ओढ़ लिए।

थोड़ी देर बाद…

इवांश इस वक्त अपनी कॉलेज क्लास के अंदर बैठा अपना लेक्चर अटेंड कर रहा था। लेकिन उसका ध्यान पढ़ाई में बिल्कुल नहीं था—उसका दिमाग बार-बार घूमकर उसके अंडरगारमेंट्स पर जा रहा था! अजीब बात यह थी कि आज भी उसने वही अपने फेवरेट 'फूल-पत्ती वाले' अंडरगारमेंट्स पहन रखे थे।

तभी अचानक उसे ख्याल आया— 'तो इसमें कौन सी बुरी बात है... अगर मैं ऐसे अंडरगारमेंट्स पहनता हूँ तो?!'

यह सोचते-सोचते वह ख्यालों की दुनिया में कहीं बहुत दूर पहुँच गया। उस सुबह के भयंकर एंबेरेसमेंट के बाद उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि उसे इस वक्त कैसा फील करना चाहिए—क्या उसे सचमुच चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए या मर जाना चाहिए?

"हाए गॉड...!"—यह सोचते-सोचते वह ख्यालों में इतना खो गया था कि उसके मुँह से ज़ोर से चीख निकल गई!

उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। प्रोफेसर अपनी जगह पर एकदम से चुप हो गए और अपनी किताब बंद करके सीधे घूरते हुए इवांश को देखने लगे। क्लास के बाकी सारे स्टूडेंट्स भी हैरान होकर मुड़-मुड़कर उसे देखने लगे—सबकी नज़रों में बस एक ही सवाल था कि यह लड़का अचानक इतनी ज़ोर से क्यों चिल्लाया? क्या इसे प्रोफेसर का लेक्चर बिल्कुल समझ नहीं आ रहा है, या फिर यह प्रोफेसर की बातों से हद से ज़्यादा इरिटेट हो चुका है?

जब इवांश ने होश संभाला और देखा कि पूरी क्लास और प्रोफेसर उसे ही घूर रहे हैं, तो उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई! उसने हड़बड़ाते हुए सबके सामने एक अजीब सी ऑकवर्ड और नकली स्माइल पास की और बोला, "आई... आई ऍम सॉरी... सॉरी सर!"

और फिर शर्म के मारे बिना किसी से नजरें मिलाए, वह चुपचाप अपना सिर अपनी ही स्टडी टेबल पर रखकर नीचे लेट गया, जैसे कह रहा हो— भगवान, अब इस धरती को फाड़कर मुझे अंदर ही समा ले, क्योंकि इस ज़िल्लत के बाद अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा!


वहीं स्कूल में….


स्कूल में लंच ब्रेक अभी-अभी खत्म हुआ था और सारे बच्चे अपने-अपने क्लास की तरफ जा रहे थे। झील अकेले ही कॉरीडोर में चल रही थी, तभी अचानक से किसी ने उसका हाथ पकड़ा और खींचकर गर्ल्स वॉशरूम के अंदर ले गया। एक झटके के साथ उसने झील को वॉल से लगा दिया।

सामने मयंक राणा खड़ा था। वही झील की क्लास का बिगड़ैल लड़का, बिल्कुल बैड बॉय स्टाइल में। स्कूल में सब जानते थे कि मयंक कैसा है और झील उससे बहुत ज्यादा डरती थी।

मयंक ने थोड़ा झुकते हुए कहा, "अरे स्वीटहार्ट...? कितने दिनों बाद स्कूल में दिखी हो? मेरे प्रपोज करने के बाद से तो तुम स्कूल से गायब ही हो गई थीं। क्या हुआ, क्या तुम मुझे इग्नोर करने की कोशिश कर रही हो?"

झील की हालत खराब थी। उसने हकलाते हुए कहा, "न... नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है..."

लेकिन मयंक की नजरें बहुत गंदी थीं। वो झील के खूबसूरत चेहरे से होती हुई उसकी क्लीवेज की तरफ देखने लगा और बोला, "तो फिर बात क्या है? अगर तुम मुझे इग्नोर नहीं कर रही हो, तो अभी तक मेरे मैसेज का रिप्लाई क्यों नहीं किया? तुम्हें पता है ना मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ? और तुम मुझसे बचकर भाग रही हो? बताओ, मेरी गर्लफ्रेंड कब बन रही हो...?"

झील की आँखें डर के मारे फटी की फटी रह गईं। वो मयंक की तरफ ठीक से देख भी नहीं पा रही थी। उसकी घिनौनी नजरों को महसूस करके झील को बहुत ज्यादा अनकंफर्टेबल फील हो रहा था। उसने काँपते हुए कहा, "मैं... मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं बन सकती..."

यह सुनते ही मयंक अजीब तरह से हँसने लगा। उसकी वो हँसी बहुत खौफनाक थी।

वो गुस्से में चिल्लाया, "क्या कहा तूने? तू मेरी गर्लफ्रेंड नहीं बनेगी? तुझे पता भी है? पूरी क्लास की लड़कियाँ मेरी गर्लफ्रेंड बनने के लिए मरती हैं, क्योंकि मयंक राणा का स्वैग ही अलग है! और तू मुझे इग्नोर करती है? अभी के अभी तूने मुझे रिजेक्ट किया है? लाइक सीरियसली? तू मुझे रिजेक्ट करने के बारे में सोच भी कैसे सकती है?!"

इतना बोलते ही मयंक और ज्यादा उसके करीब आने लगा। झील का डर के मारे बुरा हाल हो गया था। उसने मयंक को हल्का सा पुश करते हुए कहा, "मयंक, प्लीज! ये सब मत करो... तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं बन सकती, प्लीज मुझसे दूर रहो... मुझे बहुत डर लग रहा है।"

मयंक ने बिल्कुल पास आकर उसके कान के पास कहा, "कम ऑन स्वीटहार्ट... बस एक बार ट्राई करके देख, उसके बाद तुझे बिल्कुल डर नहीं लगेगा, बल्कि बहुत मजा आएगा।"

अब झील की आँखों से आँसू बहने लगे। वो उसे खुद से दूर करने की लाख नाकाम कोशिश कर रही थी और रोते हुए बोल रही थी, "प्लीज मयंक... प्लीज मुझे छोड़ दो..."

तभी अचानक बाहर से किसी की आवाज़ आई, "कौन है वॉशरूम के अंदर? ये कैसी आवाज़ है...?"

यह आवाज़ सुनते ही मयंक के होश उड़ गए क्योंकि वो गर्ल्स वॉशरूम के अंदर था। पकड़े जाने के डर से वो तुरंत पास वाले एक बाथरूम के अंदर घुस गया। असल में वहाँ वॉशबेसिन के साइड में एक-एक करके कई सारे क्यूबिकल्स (बाथरूम) बने हुए थे और वो लोग अभी बेसिन के पास ही खड़े थे।

मयंक के हटते ही झील ने चैन की साँस ली। तभी वॉशरूम के अंदर जो लड़की आई, वो कोई और नहीं बल्कि कनिष्का थी।

कनिष्का ने जब झील की ऐसी हालत देखी—उसकी सूजी हुई आँखें और चेहरे पर आँसू—तो वो हैरान रह गई। वो तुरंत भागकर झील के पास आई और बोली, "सीनियर, आप? ओह माय गॉड! फाइनली आप स्कूल आ ही गईं! मुझे तो लगा था कि आपने शायद स्कूल ही चेंज कर लिया है..."

कनिष्का झील को बहुत अच्छे से जानती थी और उसकी बहुत रिस्पेक्ट भी करती थी। वजह ये थी कि झील पढ़ाई में बहुत स्मार्ट और इंटेलिजेंट थी। बस प्रॉब्लम ये थी कि वो बहुत इनोसेंट (भोली) थी। स्कूल में जैसे कनिष्का की कोई खास फ्रेंड नहीं थी, वैसे ही सेम सिचुएशन झील की भी थी।

झील ब्यूटी विद ब्रेन का परफेक्ट एग्जांपल थी—बहुत खूबसूरत और स्मार्ट। लेकिन वो थोड़ी ज्यादा ही शांत स्वभाव की थी, किसी सेालतू बात नहीं करती थी। इसी वजह से स्कूल के बाकी बच्चे अक्सर उसे बुली (परेशान) किया करते थे।

कनिष्का इसके बिल्कुल अपोजिट थी। वो चुप बैठने वालों में से नहीं थी, सबको मुँहतोड़ जवाब देती थी। कनिष्का जानती थी कि झील का कोई दोस्त नहीं है और वो अकेली रहती है, इसलिए वो फौरन उसके पास आ गई और बोली, "आप यहाँ अकेले हो? लेकिन... मुझे अभी यहाँ किसी और के होने की भी आवाज़ आ रही थी। क्या यहाँ कोई और भी है?"

डर के मारे झील का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने तुरंत बात संभालते हुए कहा, "न... नहीं, यहाँ कोई भी नहीं है। मैं बस... वॉश रूम यूज़ करने आई थी। चलो, हम बाहर चलते हैं।"

और इसके बाद झील और कनिष्का दोनों फौरन वहाँ से बाहर निकल आईं।


To be Continued…..


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Dark Angel

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